Home Haal-khayal देश में बना कमाई का जरिया ! | Cesarean Delivery |

देश में बना कमाई का जरिया ! | Cesarean Delivery |

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भाईसाब, क्या आपको पता है वर्षों पहले हॉस्पिटल की सुविधाएं बहुत कम थी, तब गर्भवती महिलाओं की घर पर ही नॉर्मल डिलीवरी हो जाती थी और उसमें स्टिचस या टांके नहीं लगते थे। लेकिन अब देश में पैसा कमाने का अनोखा खेल खेला जा रहा है, 10 घंटे का काम 30 मिनट में करके पैसा कमाया जाता है, लेकिन रिजल्ट की परवाह नहीं की जाती। जबकि रिजल्ट कई बार खतरनाक साबित हो जाता है। जी हां यहां बात हो रही है, सिजेरियन डिलीवरी की। इस खेल में देश के बड़े महानगरों से लेकर छोटे शहर भी शामिल हैं।

भाईसाब, आज का हमारा लेख इसी विषय को लेकर पड़ताल करेगा और देशभर के निजी निजी अस्पतालों में बिना पूर्व योजना हो रही सिजेरियन डिलीवरी के बारे में खुलासा करेंगे, जो केवल पैसे कमाने के लिए किये जा रहे हैं।
भाईसाब, कहते हैं महिला जब बच्चे को जन्म देती है तो यह उसका भी दूसरा जन्म होता है। लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जहां विदेशों में डिलीवरी का बीमा काफी महंगा है, वहीं भारत में इसको लेकर बने नियमों का पालन तक नहीं होता। कई बार दर्द मुक्त डिलीवरी के लिए महिलाएं नॉर्मल डिलीवरी के बजाए सीजेरियन का विकल्प चुनती हैं। कभी-कभी तो बड़े घरों में मुहूर्त के लिए सीजेरियन डिलीवरी को चुना जाता है। आलम यह है कि देश में बड़े शहरों ने स्थिति को काफी गंभीर बना दिया है। भाईसाब, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में सर्जरी से पैदा होने वाले बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है जिसे स्वास्थय मंत्रालय कम करने के प्रयासों में भी लगी है लेकिन राष्ट्रीय परिवार कल्याण सर्वे के आंकड़ों की मानें तो यह सिजेरियन डिलीवरी के मामले तेजी से बढ़ते ही जा रहे हैं। आकंड़ों के मुताबिक, देश में हर साल 2.40 करोड़ बच्चों का जन्म होता है, जिनमें से करीबन 80 फीसदी बच्चे अस्पतालों में पैदा होते हैं जिसमें 21.5 फीसदी यानि करीब 41 लाख बच्चों का जन्म हर साल सिजेरियन प्रसव से होता है। सिजेरियन के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, साल 2019-2021 में 21.5 फीसदी दर्ज किए गए। जबकि शहरी क्षेत्रों में प्राइवेट हास्पिटल्स में 2 में 1 डिलीवरी सर्जरी से हो रही है हालांकि इससे पहले 2015-2016 के सर्वे के मुताबिक, देश में सिजेरियन डिलीवरी के मामले 17.2 फीसदी थे यानि 5 वर्षों में यह मामले 4 फीसदी बढ़ गए हैं। इससे पहले 2005-2006 के सर्वे के मुताबिक, सिजेरियन डिलीवरी के मामले महज 8.5 फीसदी दर्ज किए गए थे। आपको बता दें कि प्राइवेट हेल्थ सेंटर में सिजेरियन डिलीवरी के मामले ज्यादा देखने को मिल रहे हैं। प्राइवेट अस्पतालों से आए दिन यह खबरें भी सुनने को मिलती हैं कि वहां पर बिल बनाने के लिए यह सब किया जाता है। हाल ही में हुए आंकड़े भी इस बात को ओर ही संकेत देते हैं। प्राइवेट हेल्थ सेंटर में सिजेरियन डिलीवरी के 47.4 फीसदी मामले सामने आए जिनमें से शहरों में 49.3 फीसदी और ग्रामीण इलाकों में 46 फीसदी औसत दर पाया गया। प्राइवेट हेल्थ सेंटर में 40।9 फीसदी प्रसव के मामले सिजेरियन से हुए थे यानि ये आकंड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। वहीं सरकारी हेल्थ सेंटरों में 14.3 फीसदी सिजेरियन डिलीवरी हुई हैं। हैरान कर देने वाली बात ये है कि सरकारी हेल्थ सेंटरों में भी सीजेरियन प्रसव के मामले बढ़ रहे हैं। परंतु यह आंकड़ें मामूली ही हैं। हाल ही में हुए सर्वे के आंकड़ों के अनुसार, शहरी इलाकों के सरकारी हेल्थ सेंटरों में 22.7 और ग्रामीण इलाकों में 11.9 फीसदी मामले सामने आए हैं। भाईसाब, सबसे हैरान कर देने वाला खुला IIM -अहमदाबाद ने एक अध्ययन किया गया था, जिसके मुताबिक देश में ज्यादातर प्रसव बिना पूर्व योजना के सीजेरियन के जरिए हुए। इन्हें रोका जा सकता था। ये ऑपरेशन पैसे कमाने के लिए किए गए। अध्ययन में कहा गया है कि सीजेरियन डिलीवरी से संबंधित परिवार पर आर्थिक दबाव पड़ता है। इससे नवजात को स्तनपान कराने में देरी होती है। उसका वजन कम हुआ, सांस लेने में तकलीफ भी हुई। नवजातों को अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ा।
भाईसाब, जानकारों का मानना है कि उस जमाने में ब्याह जल्दी हो जाते थे पर अब ब्याह देर से होते हैं। जल्दी ब्याह होने से बच्चे भी जल्दी हो जाते थे और नार्मल डिलीवरी में कोई समस्या नहीं आती थी। आजकल तो शादी 35 के बाद होते हैं उनको कंसीव करने में भी बहुत समस्या आती है। जहां तक हो सके 25 से पहले शादी हो जानी चाहिए और 30 से पहले बच्चे, ताकि समस्या न आए। भाईसाब, आपको जानकारी के लिए बता दें कि नौकरीपेशा और संपन्न परिवार की महिलाएं आमतौर पर प्रसव पीड़ा से बचना चाहती हैं। इसलिए कुछ महिलाएं सीजेरियन का विकल्प चुन रही हैं। बच्चों के जन्म के लिए भी मनपसंद दिन का चुनाव किया जा रहा है। इसमें जन्माष्टमी और नववर्ष के वक्त की मांग ज्यादा रहती है। कुछ केस में ज्योतिष से समय पूछकर सीजेरियन डिलीवरी कराया जाता है। भाईसाब, आपको सीजेरियन डिलीवरी से होने वाली समस्याओं से भी अवगत करा दें, आपको बता दें कि ऑपरेशन से प्रसव के बाद सामान्य होने में समय लगता है और हां सीजेरियन डिलीवरी के बाद मोटापे की आशंका अधिक रहती है। वहीं विशेषज्ञों का ये भी कहना है कि सिजेरियन डिलीवरी मां और बच्चे की सेहत के लिए बहुत सुरक्षित होता है, जबकि नॉर्मल डिलीवरी में संक्रमण के चांसेस ज्यादा होते हैं। सिजेरियन डिलीवरी के दौरान मां को नॉर्मल डिलीवरी की तुलना में कम दर्द सहना पड़ता है। सिजेरियन डिलीवरी में ऑपरेशन का समय निश्चित हो जाता है, जिससे महिला को सभी तैयारी का मौका मिल जाता है, जबकि नॉर्मल डिलीवरी में ऐसा नहीं होता है। नॉर्मल डिलीवरी में दर्द ज्यादा होता है लेकिन महिला को ज्यादा दिन अस्पताल में रहकर रिकवर नहीं करना पड़ता है। सिजेरियन डिलीवरी यानि ऑपरेशन के बाद महिला को रिकवर करने में थोड़ा वक्त लगता है। सिजेरियन डिलीवरी होने पर महिला को कुछ महीनों तक दर्द का सामना करना पड़ता है, जबकि नॉर्मल डिलीवरी में ऐसा नहीं है ।
भाईसाब, विशेषज्ञों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार जब प्रसव होता है तो बहुत भयानक दर्द होता है परंतु एनस्थिसिया की मदद से इसको पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है। वैसे तो इसके लिए बहुत सारी तकनीकें इस्तेमाल की गईं परन्तु जो सबसे ज़्यादा कारगर रही है वो है एपीड्यूरल एनस्थिसिया। इस तकनीक में कमर की हड्डियों के बीच में बहुत पतली सी नलिका डाल कर एनस्थिसिया की दवाइयां चलाई जाती हैं जिससे मरीज़ का दर्द पूरी तरह ख़त्म हो जाता है। दवा की मात्रा केवल उतनी ही दी जाती है जिससे कि मरीज़ का दर्द ख़त्म हो जाए पर गर्भाशय के संकुचन पूरी तरह महसूस हों जिससे वो बच्चे को बाहर धकेल सके। यदि किसी परिस्थिति में बीच में ही ऑपरेशन का निर्णय लेना पड़ जाए तो एपीड्यूरल से ही एनस्थिसिया भी दिया जा सकता है। साथ ही ये तकनीक पूरी तरह सुरक्षित है। जिन मरीज़ों में गंभीर बीमारियां हैं केवल उनमें नहीं लगाया जा सकता एपीड्यूरल बाक़ी हर मरीज़ में ये डाला जा सकता है एवं दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है ।
भाईसाब, ये भी आपको जानकारी दे दें कि डिलीवरी केस में सीजेरियन की संख्या 15 फीसदी होनी चाहिए, जबकि आज के समय में निजी अस्पतालों में 70 फीसदी से ज्यादा सीजेरियन डिलीवरी हो रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय भी इन सीजेरियन डिलीवरी को लेकर चिंता में है। मंत्रालय की ओर से बार-बार लोगों से अपील की जा रही है कि इस तरह की डिलीवरी से बचें। तो भाईसाब, ये थी जानकारी डिलीवरी केस में सीजेरियन की, आशा करते है यह जानकारी आपको जरूर पसंद आई होगी, ऐसी ही अन्य रोचक जानकारी के लिए जुड़े रहें भाईसाब के साथ, धन्यवाद!

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