Home Dharohar कभी लोगों के लिए सुरक्षित घर हुआ करती थीं गुफाएं : | Caves of Vanavar Hills |

कभी लोगों के लिए सुरक्षित घर हुआ करती थीं गुफाएं : | Caves of Vanavar Hills |

0 comment

भाईसाब, क्या आपको पता है, ऐसा भी कभी समय था जब गुफाएं लोगों के लिए सुरक्षित घर हुआ करती थीं और उन्हें हर तरह के मौसम से बचाने का काम करती थीं। वाणावर पहाड़ियों की गुफाएं इसका अच्छा उदाहरण हैं। गुफाएं भी कभी निवास करने की सुरक्षित और हर मौसम के अनुकूल रही होंगी, वाणावर यानी बराबर पहाड़ियों पर करीने से बनीं गुफाएं इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। तो भाईसाब आज के इस लेख में हम देश के बिहार राज्य की ऐतिहासिक धरोहर ‘वाणावर गुफाएं’ के बारे में जानेंगे, जिसे जानकार आप दांतों तले उंगली दबा लेंगे, जो दुनिया भर के पयर्टकों के लिए आकर्षण का केंद्र है।

– सम्राट अशोक ने बौद्ध भिक्षुओं के लिए बनाई थीं गुफाएं।
– मौर्य काल की यह स्थापत्य कला पर्यटकों को आश्चर्य से भर देती है।
– गुफाओं के प्रवेश द्वार पर ही सम्राट अशोक के अभिलेख हैं।

भाईसाब, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बिहार के जहानाबाद का ऐतिहासिक पर्यटक स्थल वाणावर की वादियां यूं तो पूरे साल गुलजार रहती है। यहां देसी-विदेशी पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहता है। बोधगया, पावापुरी व नालंदा से आने वाले अधिकांश विदेशी पर्यटक वाणावर की गुफाओं की सैर करना नहीं भूलते हैं। अगर आपको कभी इन गुफाओं में जाने का मौका मिलता है, तो यह प्राचीन सभ्यताओं के बारे में जानने का एक अच्छा अवसर होगा। साथ ही आपको यहां आकर बहुत ही रोचक और रोमांचक अनुभव भी होगा। वाणावर पहाड़ियां बहुत पुरानी हैं और क्षेत्र के लोग इन्हें मगध का ‘हिमालय’ भी कहते हैं। यहां अक्टूबर से लेकर मार्च के बीच यात्रा करना सबसे अच्छा है।
भाईसाब आपको बता दें कि वाणावर पहाड़ी पर स्थित सिद्धेश्वर नाथ महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक बहुत पुराना मंदिर है। इस मंदिर में वैसे तो पूरे साल लोग जल चढ़ाने आते हैं, लेकिन सावन के महीने में यहां दर्शन करने के लिए लोगों की संख्या काफी अधिक होती है। मंदिर में बहुत समय पहले के कुछ विशेष लेख हैं जब अशोक नाम का राजा शासन करता था। ये लेख हमें बताते हैं कि उस समय चीज़ें कैसे चलायी जाती थीं। वाणावर न केवल अपने पहाड़ों और जंगलों के लिए जाना जाता है, बल्कि उन पौधों के लिए भी जाना जाता है जिनका उपयोग दवा और लौह अयस्क के लिए किया जा सकता है। यह गया से लगभग 30 किलोमीटर और जहानाबाद से 25 किलोमीटर दूर है। इस स्थान का प्राकृतिक सौन्दर्य अत्यंत शान्त एवं स्वच्छ है। पहाड़ी पर आपको खूबसूरत रॉक पेंटिंग भी देखने को मिलेगी। पिछले कुछ समय से इस जगह को और ज्यादा सुंदर और सुरक्षित बनाने के लिए सरकारी स्तर पर काम चल रहा है। सुरक्षा के लिए एक पुलिस स्टेशन बनवाया गया है। हर साल यहां राजकीय वाणावर महोत्सव का भी आयोजन होता है। वे पहाड़ पर चढ़ना आसान बनाने के लिए एक लंबा रोपवे बना रहे हैं, लेकिन इसमें काफी समय लग रहा है।
भाईसाब, हैरान कर देने वाली बात ये है कि वाणावर की पहाड़ियों पर कुल सात गुफाएं हैं, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक आते हैं। इनमें चार वाणावर पहाड़ियों पर और तीन पास में ही नागार्जुन की पहाड़ियों पर हैं। पहाड़ों को सावधानी से काट कर हजारों साल पहले इंसान ने इस बेहद सुंदर गुफाओं को बनाया। इनमें से कई गुफाओं की दीवारों को देखकर आप दंग रह जाएंगे। इसकी चिकनाई आज के समय में लगाई जाने वाली टाइल्स से कम नहीं है। मौर्य काल की यह स्थापत्य कला पर्यटकों को आश्चर्य से भर देती है। इनका निर्माण सम्राट अशोक के आदेश पर आजीवक संप्रदाय के बौद्ध भिक्षुओं के रहने के लिए करवाया गया था। इसमें कर्ण चौपर, सुदामा और लोमस ऋषि गुफा अपनी स्थापत्य कला के लिए देश और दुनिया में प्रसिद्ध हैं। गुफाओं के प्रवेश द्वार पर ही सम्राट अशोक के अभिलेख हैं। ब्राह्मी लिपि के जानकार इसे पढ़ और समझ पाते हैं। गाइड इसके बारे में विस्तार से बताते हैं। भाईसाब, बाबा सिद्धनाथ मंदिर वाणावर पर्वत की चोटी पर स्थित एक विशेष स्थान है। इसका निर्माण बहुत समय पहले, सातवीं शताब्दी में हुआ था। लोग यह भी कहते हैं कि जरासंध नाम के एक बहुत ही महत्वपूर्ण सम्राट ने इस मंदिर का निर्माण उससे भी पहले एक अलग समय में किया था, जिसे द्वापर युग कहा जाता है। पुराने समय में, राजगीर किले तक जाने के लिए लोग एक छिपा हुआ रास्ता अपनाते थे। यह किला मगध का मुख्य शहर हुआ करता था। जरासंध भी इसी रास्ते का उपयोग कर मंदिर में प्रार्थना करने के लिए आते थे। पहाड़ी के नीचे विशाल जलाशय पातालगंगा में स्नान कर मंदिर में पूजा अर्चना की जाती थी। यह जलाशय आज भी है।
भाईसाब, यदि आपका यहां जाने का मन करे तो आप पटना से सड़क के रास्ते से यहां तीन से चार घंटे में पहुंच सकते हैं। यहां पर्यटकों की सुविधा के लिए सरकार की ओर से कई इंतजाम किए गए हैं, सुरक्षा के लिए पुलिस रहती है, वहीं खान-पान और ठहरने की सुविधा भी आसानी से मिल जाती है। नजदीकी हवाई अड्डा, गया और पटना है। पुरानी सभ्यताओं के बारे में जानने समझने के प्रति अभिरुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए यहां की यात्रा यादगार रहेगी।
तो भाईसाब, आशा करते हैं यह जानकारी आपको जरूर पसंद आई होगी, ऐसी ही अन्य रोचक जानकारी के लिए जुड़े रहें भाईसाब के साथ, धन्यवाद!

banner

You may also like

bhaisaab logo original

About Us

भाई साब ! दिल जरा थाम के बैठिये हम आपको सराबोर करेंगे देशी संस्कृति, विदेशी कल्चर, जलेबी जैसी ख़बरें, खान पान के ठेके, घुमक्कड़ी के अड्डे, महानुभावों और माननीयों के पोल खोल, देशी–विदेशी और राजनीतिक खेल , स्पोर्ट्स और अन्य देशी खुरापातों से। तो जुड़े रहिए इस देशी उत्पात में, हमसे उम्दा जानकारी लेने और जिंदगी को तरोताजा बनाए रखने के लिए।

Contact Us

Bhaisaab – All Right Reserved. Designed and Developed by Global Infocloud Pvt. Ltd.