Home Gali Nukkad दम घोट रही पराली | Burning Stubble: Smoke Problem

दम घोट रही पराली | Burning Stubble: Smoke Problem

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Burning Parali

भाईसाब, गाहे-बगाहे आपने पराली का नाम तो जरूर सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पराली, पूरे उत्तर भारत में प्रदूषण की बड़ी समस्या को भी लेकर आता है, इसके कारण खुली हवा में सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है, बीते कई सालों देश की राजधानी दिल्ली समेत NCR और इसके आसपास का इलाका भारी प्रदूषण की समस्या से लगातार जूझता आया है, खासकर, पारली जलाने की वजह से सर्दी के दिनों में प्रदूषण का लेवल और बढ़ जाता है, आपको बता दें कि पराली को किसान जलाते हैं, आखिर पराली होती क्या है, और किसान पराली को जलाते क्यों है?

भाईसाब, हर साल नवंबर आते ही दिल्ली-NCR प्रदूषण की चपेट में आ जाता है, इन दिनों केंद्र और दिल्ली सरकार की तमाम कोशिशों के बाद दिल्ली-NCR में छाई धुंध की चादर हटने का नाम नहीं लेती है, आपको बताना जरूरी है कि दिल्ली-NCR में प्रदूषण के पीछे अव्यवस्थित शहरीकरण, उद्योग और वाहनों के ज्यादा घनत्व के अलावा पंजाब समेत उत्तर भारतीय राज्यों में पराली जलाने से उठने वाले धुएं को भी एक वजह बताया जाता है, भाईसाब, आपको सुनकर हैरानी होगी कि पराली मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई जा चुकी है, इस मामले को लेकर पिछले साल सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी हुई है, इस दौरान कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि राज्य सरकारें सख्त कदम उठाएं, वरना हमने अपना बुलडोजर शुरू किया तो फिर हम रुकेंगे नहीं, इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने पराली के मुद्दे पर कहा कि पंजाब में धान की फसल को फेज वाइज बाहर किया जाए, केंद्र सरकार इसमें वैकल्पिक फसल यानी मोटे अनाज की फसल के लिए मदद करे. भाईसाब, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नवंबर के महीना वही समय होता है, जब पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान में धान फसल की कटाई होती है, ऐसे में फसलों के अवशेष यानी पराली जलाने से उठने वाला धुआं भी प्रदूषण की वजहों में एक बन जाता है, इससे दिल्ली-NCR में रहने वाली करीब 10 करोड़ से ज्यादा आबादी के लिए सांसों का संकट बन जाता है, इस तरह वायु प्रदूषण के चलते लोगों की सेहत बिगड़ सकती है, इससे हृदय रोग, स्ट्रोक, Chronic obstructive pulmonary disease, फेफड़ों का कैंसर और सांस लेने में परेशानी का खतरा बढ़ जाता है. भाईसाब, बता दें कि धान की फसल कटने के बाद खेत में बचे हुए हिस्से को पराली कहते हैं, पहले किसान अपनी फसल खुद काटते थे, या मजदूर से कटवाते थे तो फसल का बहुत थोड़ा हिस्सा खेतों में रहता थे जिसे जलाने की जरुरत नहीं होती थी, लेकिन पिछले कुछ सालों से धान की फसल की कटाई मशीनों से की जाती है, यह मशीन फसल का सिर्फ ऊपरी हिस्सी काटती है बाकी का हिस्सा जमीन में ही रह जाता है, जो काफी ज्यादा बचता है, वहां किसान दूसरी फसल की बुआई से पहले इसे जला देते हैं, भाईसाब, ये जान लें कि पंजाब में पराली जलाने की सबसे ज्यादा घटनाएं सामने आती हैं, इस लिस्ट में हरियाणा दूसरे नंबर और उत्तर प्रदेश तीसरे नंबर पर है. भाईसाब, पराली जलाने संबंधी कानून भी हैं, भारतीय दंड संहिता के तहत धारा 188 पराली जलाने को अपराध बनाती है, इसे 1981 के वायु रोकथाम और प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम के तहत एक अपराध के रूप में भी अधिसूचित किया गया, वहीं नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 10 दिसंबर, 2015 को उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान राज्यों में पराली जलाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया, इसके अलावा नवंबर 2019 में, भारत के Supreme court ने पंजाब, उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सरकारों को पराली जलाने की प्रथा को रोकने के लिए किसानों को वित्तीय प्रोत्साहन का भुगतान करने का निर्देश दिया था, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि हरियाणा, दिल्ली और पंजाब में हर जगह अच्छा स्वास्थ्य होना अनिवार्य है, केंद्र सरकार को किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए टास्क फोर्स बनाना चाहिए ।

चलते-चलते भाईसाब, आपको जानना जरूरी है कि किसान पराली क्यों जलाते हैं, तो उत्तर ये है कि, धान की पराली आमतौर पशु चारे के लिए इस्तेमाल नहीं की जाती और किसानों के पास रबी की फसल की बुआई के लिए सिर्फ 20 दिन का समय बचता है, ऐसे में अवशेष को decompose करने का विकल्प किसानों के लिए मुफीद नहीं होता, वे खेतों को साफ करने के लिए पराली में आग लगा देते हैं, इससे किसानों का समय और पैसे दोनों बच जाते हैं, यही वजह है कि राज्य सरकारों के सख्त रवैये के बावजूद किसान चोरी छिपे इसमें आग लगा देते हैं.

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