Home Sports किक्रेट की दुनिया का जादुई स्पिनर | Cricketer : Bishan Singh Bedi |

किक्रेट की दुनिया का जादुई स्पिनर | Cricketer : Bishan Singh Bedi |

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भाईसाब, आज हम एक ऐसे क्रिकेटर के बारे में जानेंगे जिसने भारत की पहली वनडे जीत में अहम भूमिका निभाई थी। भारतीय टीम का वह दिग्गज स्पिन गेंदबाज जो अपनी एक ही गेंदबाजी एक्शन से चार तरह की गेंदें फेंक लिया करता था। दुनिया के सर्वश्रेष्ठ स्पिनर कहे जाने वाले शेन वॉर्न भी उन्हें अपने आदर्श मानते थे। वह भारत की प्रसिद्ध स्पिनर चौकड़ी जिसमें इरापल्ली प्रसन्ना, बीएस चंद्रशेखर और एस वेंकटराघवन भी शामिल थे, उनका हिस्सा थे। 12-8-6-1 के उनके बेहतरीन गेंदबाजी आंकड़ों ने 1975 विश्व कप मैच में पूर्वी अफ्रीका को 120 तक सीमित कर दिया था। 1970 के दशक में टीम इंडिया की स्पिन की जान कहलाने वाले जादुई स्पिनर और टीम इंडिया के पूर्व कप्तान बिशन सिंह बेदी का हाल ही में 77 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह पिछले काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे और करीब एक महीने पहले उनके घुटने सहित कई सर्जरी हुई थी।

– अपनी पीढ़ी के बल्लेबाजों के लिये हमेशा अबूझ पहेली बने रहे
– उन्होंने हमेशा अपने कपड़े धोए हैं। उनके हिसाब से यह कंधों के लिए सबसे बढ़िया एक्ससाइज है।
– बतौर कोच भी संवरा कई खिलाड़ियों का करियर
– टेस्ट क्रिकेट में 200 विकेट लेने वाले पहले गेंदबाज थे
– पूरे फर्स्ट क्लास करियर में उन्होंने 1560 विकेट लिए
– 50 पैसे के सिक्के पर लगातार 6 गेंदें फेंक सकते थे
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पुरस्कार- सम्मान- उपलब्धियां
– 1967 में भारतीय क्रिकेटर ऑफ द ईयर
– 1969 में भारत सरकार की ओर से अर्जुन पुरस्कार
– 1970 में भारत सरकार की ओर से पद्म श्री पुरस्कार
– 2004 में सीके नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड
– 2015 में विजडन इंडिया हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया था
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बिशन सिंह बेदी का जन्म 25 सितंबर 1946 को पंजाब के अमृतसर शहर में हुआ था। उनका बचपन वहीं गुजरा था। वह बचपन में कंचे खेला करते थे और कंचे के चैंपियन कहे जाते थे। उन्होंने इसके बारे में ऑल अबाउट क्रिकेट शो पर बात करते हुए कहा था, “मैं अच्छा एथलीट नहीं था। लेकिन मुझमें काफी ज्यादा लचीलापन था। कंचे खेलकर मेरा फोकस छोटी चीजों पर काफी अच्छे से होता था। मेरे हाथ में हमेशा बॉल रहती थी। सुबह से लेकर शाम तक, मैं कभी गेंद को छोड़ता ही नहीं था।”
लेकिन भाईसाब, उन्होंने लगभग 12 साल तक भारतीय गेंदबाजी का जिम्मा संभाला। यह बेहद कलात्मक बायें हाथ का स्पिनर अपनी पीढ़ी के बल्लेबाजों के लिये हमेशा अबूझ पहेली बना रहा। वह गेंद को जितना संभव हो उतनी ऊंचाई से छोड़ते थे और उनका नियंत्रण गजब का था। वह भारतीय क्रिकेट इतिहास के इकलौते ऐसे बॉलर हैं, जिन्होंने अपने पूरे फर्स्ट क्लास करियर में 1560 विकेट लिए। वह भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट में 200 विकेट लेने वाले पहले गेंदबाज थे।

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भाईसाब, वो कंचे खेलते थे लेकिन वहीं से उनके महान स्पिनर बनने की शुरुआत हुई थी। भाईसाब, वो 50 पैसे के सिक्के पर लगातार 6 गेंदें फेंक सकते थे और बल्लेबाज को इस बात का अंदाजा भी नहीं लगने देते थे कि हर बार गेंद अलग कोण या एंगल से आएगी।
उन्होंने 1966 से 1979 तक टेस्ट क्रिकेट खेला। उन्होंने कुल 67 टेस्ट मैचों में 266 विकेट लिए। वह 22 टेस्ट मैचों में भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान भी रहे। बेदी एक रंगीन पटका पहनते थे। उन्होंने खुलेतौर पर अपने विचार क्रिकेट से जुड़े मुद्दों पर व्यक्त किए। घरेलू क्रिकेट में, बेदी 15 साल की उम्र से उत्तर पंजाब के लिए खेलते थे। वह 1968-69 और 1974-75 के रंजी ट्रॉफी सीजन के लिए दिल्ली चले गए। जहां उन्होंने रिकॉर्ड 64 विकेट झटके। बेदी बहुत समय तक इंग्लिश काउंटी क्रिकेट की नॉर्थम्पटोनशायर के लिए भी खेले। उन्होंने 1560 विकेट के साथ अपना फर्स्टक्लास करियर खत्म किया। यह आंकड़ा किसी भी अन्य भारतीय खिलाड़ी से अधिक है।
भाईसाब, उनकी बॉलिंग को प्रभावी, यहां तक की खूबसूरत, चतुराईभरी और कलात्मक कहा गया। वह गेंद को फ्लाइट कराने और स्पिन की लगभग सभी खूबियों में सिद्धहस्त रहे। उनकी बॉलिंग एक्शन इतनी आरामभरी और संतुलित थी कि वह पूरे दिन रिदम और कंट्रोल के साथ गेंदबाजी कर सकते थे। उनका सबसे बढ़िया बॉलिंग का प्रदर्शन 1969-70 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कलकत्ता में था। जहां उन्होंने 98 गेंद में 7 विकेट लिए थे। उनका सबसे बेहतरीन मैच फीगर 1978-79 में पर्थ में था जहां 194 रनों पर उन्होंने 10 विकेट लिए। यह भी ऑस्ट्रेलिया के विरूद्ध था।
लेकिन भाईसाब, उनकी बल्लेबाजी काफी कमजोर थी परंतु नॉर्थम्पटनशायर और हैम्प्शायर के बीच एक मैच में बाउंड्री जमाकर उन्होंने मैच जिताया था। उनका बल्लेबाजी का अधिकतम स्कोर 50 रन नॉट आउट है। टेस्ट में उनकी अकेला अर्धशतक 1976 में कानपुर में न्यूजीलैंड के खिलाफ था।
उनको 1976 में भारतीय क्रिकेट टीम का कप्तान बनाया गया। उनकी कप्तानी में पहली बार टेस्ट मैच वेस्टइंडीज के विरूद्ध 1976 में पोर्ट-ऑफ-स्पेन में जीता गया था। इसके बाद, भारत ने न्यूजीलैंड के खिलाफ भी टेस्ट सीरिज 2-0 से जीती। भारत न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत में ही, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ और पाकिस्तान के खिलाफ सीरिज हार गया। इन हार के बाद, कप्तानी बिशनसिंह बेदी से छीनकर, सुनील गावस्कर को दे दी गई।
लांस गिब्स के बाद, बेदी ऐसे खिलाड़ी हैं जिनके नाम हर टेस्ट मैच के हिसाब से सबसे अधिक मैडेन ओवर खेलने का रिकॉर्ड है। उन्होंने 4।2 मैडेन ओवर हर विकेट डाला है। विस्डन क्रिकेटर्स अल्मानेक ने 2008 में, बिशन सिंह बेदी को सबसे अच्छे पांच क्रिकेटरों में शामिल किया जो कभी भी विस्डन क्रिकेटर ऑफ द ईयर नहीं चुने गए।
भाईसाब जैसा कि सफल आदमी हमेशा विवादों में घिरा रहता है, कुछ ऐसा ही बेदी के साथ भी हुआ, कप्तान के तौर पर, वह कुछ विवादों का भी हिस्सा रहे। 1976 में, वेस्टइंडीजे के खिलाफ एक मैच में, वेस्टइंडीज के खिलाफ रन चेस करते समय वेस्टइंडीज ने चार घातक तेज गेंदबाजों से गेंदबाजी कराई। बेदी ने इस पर आपत्ति जताई और दो खिलाड़ियों के चोट लगने के बाद रिटायर हो जाने पर बेदी ने पारी जल्दी घोषित कर दी। 1976-77 में इंग्लैंड के भारत के दौर पर, बेदी ने जॉन लेवर पर वैसलीन लगाकर बॉल को पॉलिश करने का आरोप लगाया। लेवर अपने माथे पर पसीने को आंखों में जाने से रोकने के लिए वैसलीन लगाते थे। लेवर पर बाद में इन आरोपों से गलत करार दिया गया।
1978 में, बेदी ऐसे पहले कप्तान बने जिसने मैच पूरा हुए बिना ही हार मान ली। पाकिस्तान के विरूद्ध एक दिवसीय मैच में 8 विकेट बचे होने पर, भारत को 14 गेंदों में 23 रन बनाने थे। बेदी ने क्रीज पर से बल्लेबाज बुला लिए क्योंकि वह बॉलर सरफराज नवाज की 4 बाउंसरों का विरोध कर रहे थे। इन बाउंसरों में से एक को भी वाइड करार नहीं दिए जाने पर बेदी नाराज थे।
भाईसाब, बेदी का नाम भारत के सबसे सफल बाएं हाथ के ऑर्थोडक्स स्पिनरों में शुमार रहा है। इस दौरान न सिर्फ उन्होंने क्रिकेट में अपना नाम कमाया बल्कि उससे उन्हें खूब दौलत और शोहरत भी मिली। यही कारण है कि दुनिया को अलविदा करते हुए वह अपनी पीछे करोड़ों की संपत्ति छोड़ गए। रिपोर्ट के मुताबिक बेदी का साल 2023 में कुल नेटवर्थ 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर है। भारतीय करंसी में यह करीब 41 करोड़ से भी अधिक है। इसके अलावा अलग-अलग शहरों में उनके पास आलीशान फार्म हाउस और घर भी हैं।
बिशन सिंह बेदी ने इंटरनेशनल करियर को अलविदा कहने के बाद बतौर कोच भी काम किया। बिशन सिंह ने टीम इंडिया के लिए कई युवा खिलाड़ियों को तैयार किया, जिसमें मुरली कार्तिक जैसे बड़े नाम भी शामिल रहे। कोचिंग के साथ-साथ पूर्व गेंदबाज ने कमेंट्री में भी हाथ आजमाया। साल 1990 में बिशन सिंह न्यूजीलैंड और इंग्लैंड के दौरे पर गई भारतीय टीम के मैनेजर भी रहे। इसके साथ ही उन्होंने नेशनल सेलेक्टर्स के तौर पर भी इंडियन क्रिकेट को अपनी सेवाएं दीं।
जितना बिशन सिंह बेदी को भारतीय टीम के महान स्पिनर के रूप में जाना जाता था, उतना ही उनकी पर्सनल लाइफ भी काफी चर्चा में रहती थी। उनकी प्रेम कहानी बड़ी रोचक रही। उन्होंने अपनी जिंदगी में दो बार शादी रचाई। बिशन सिंह की पहली पत्नी ऑस्ट्रेलियन थी, जिनका नाम ग्लेनिथ था।
…तो ये थी जानकारी हमारे एक महान क्रिकेटर बिशन सिंह बेदी के बारे में, आशा करते है यह जानकारी आपको जरूर पसंद आई होगी,ऐसे ही अन्य महानुभाव की जानकारी के लिए जुड़े रहें भाईसाब के साथ।।
धन्यवाद!

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