Home Khavaiya बनारसी पान : एक प्राचीन स्वाद की अनुभूति।

बनारसी पान : एक प्राचीन स्वाद की अनुभूति।

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बनारस, जिसे काशी भी कहा जाता है, वर्तमान समय में बहुत ही प्राचीन और महत्वपूर्ण शहर है। इसी के साथ बनारस का पान भी बहोत प्राचीन है। काशी को भगवान शिव की नगरी माना जाता है और मान्यता है कि बनारस का पान भगवान शिव को बहुत प्रिय है। इसे मान्यता है कि पान का पहला बीज भगवान शिव और माता पार्वती ने हिमालय के एक पहाड़ पर बोया था, इसलिए पान के पत्ते को पवित्र माना जाता है। आज भी हिन्दू धर्म में पूजा और पाठ के समय पान का विशेष महत्व है।
पान का आयुर्वेदिक दृष्टिकोण भी है और इसका अधिकांश स्वास्थ्य लाभों के साथ जुड़ा हुआ है। आयुर्वेद के जनक धन्वंतरि ने भी पान की गुणवत्ता की प्रशंसा की है और इसके औषधीय गुणों का वर्णन किया है। पान खाने से पाचन शक्ति बेहतर होती है और पान को पीसकर खाने से गला साफ रहता है, जिससे मुंह से दुर्गंध नहीं आती। पान मसूड़ों की सूजन में फायदेमंद है ,डायबिटीज नियंत्रण रखने भी पान मदद करता है। इसी के साथ साधारण बीमारिया जैसे सर्दी, एलर्जी, सिरदर्द या शरीर के किसी हिस्से में आई सूजन या चोट से छुटकारा पाने के लिए पान के पत्ते चबाना असरदार होता है।

विभिन्न प्रकार के पान बनारस में बनाये जाते हैं, जैसे बनारसी सादा पान, बनारसी मीठा पान, पंचमेवा पान, जर्दा पान, गुलकंद पान, बनारसी केसर पान, नवरत्न पान, राजरत्न पान, बनारसी अमावट पान, और बनारसी गिलोरी पान। इन पानों में विभिन्न प्रकार के मसाले और स्वादिष्ट मिठास होती है, जिन्हें व्यक्तिगत पसंद के आधार पर चुना जा सकता है।

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