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बी. आर. डी. मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर

by Jeet
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गोरखपुर अपनी ऐतिहासिक संस्कृतियों और परंपराओं के लिए लोकप्रिय है, जिससे यहाँ दूर-दूर से टूरिस्ट्स का आना-जाना रहता है| और ज़रूरी है की ऐसे माहौल में लोग अपने स्वास्थ का ख्याल रखे| ऐसे में गोरखपुर का बी. आर. डी. मेडिकल कॉलेज उन सभी लोगो के हाल-ख्याल को जानने और उनके आरोग्य होने में मदद करता है|

आइये जानते है बी. आर. डी. मेडिकल कॉलेज के बारे में – 147 एकड़ ज़मीन में फैला हुआ, बाबा राघव दस मेडिकल कॉलेज एक सरकारी कॉलेज है| यह कॉलेज उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर में बसा हुआ है, और इसका संचालन भी उत्तर प्रदेश की सरकार करती है|

इस मेडिकल कॉलेज में दूर दूर से मरीज़ अपना इलाज़ करवाने और पुरे उत्तर प्रदेश से एम. बी. बी. एस. की पढ़ाई करने के लिए यहाँ छात्र दाखिला लेने आते है।

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बी. आर. डी. मेडिकल कॉलेज की ऐतिहासिक यात्रा –

बी. आर. डी. मेडिकल कॉलेज की स्थापना १९६९ में राज्य सरकार द्वारा की गई थी। इसे शुरू में गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के नाम से जाना जाता था।

इसका नाम एक प्रचंड स्वतंत्रता सेनानी, बाबा राघव दास के नाम पर रखा गया था, जो इस क्षेत्र के एक प्रमुख सर्वोदय नेता थे और महात्मा गांधी और आचार्य विनोबा भावे के करीबी सहयोगी भी थे। इस कॉलेज कैंपस के वैज्ञानिकों ने सबसे पहले यह पता लगाया कि मैगी नूडल्स में बहुत अधिक मोनोसोडियम ग्लूटामेट होता है, जिसके परिणाम स्वरूप मीडिया में एक हाई-प्रोफाइल मामला सामने आया। इसकी स्थापना उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री, स्वर्गीय श्री चंद्रभानु गुप्ता ने की थी।

कोर्सेज और सर्विसेज – बी. आर. डी. मेडिकल कॉलेज डर्मेटोलॉजी, पीडियाट्रिक्स, जनरल सर्जरी, आब्सटेट्रिक्स और गायनोकॉलोजी, जनरल मेडिसिन, ऑर्थोपेडिक्स, साइकाइट्री, आदि जैसे विशेषज्ञता के तहत पाठ्यक्रमों के साथ १५० एम. बी. बी. एस. सीटों की पेशकश करता है।

इसे राष्ट्रीय मीडिया काउंसिल द्वारा भी मान्यता प्राप्त है।

कॉलेज कैंपस चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान का समर्थन करने के लिए आधुनिक सुविधाओं और बुनियादी संरचना से सुसज्जित है। इसमें कॉलेज छात्रों को विशाल कक्षाएँ, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएँ, छात्रावास और अन्य सुविधाएँ प्रदान करता है।

बी. आर. डी. मेडिकल कॉलेज के विभाग और छात्र सक्रिय रूप से चिकित्सा अनुसंधान में अनुरुक्त हैं और उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में कई प्रकाशनों में योगदान दिया है।

२०१७ की दुर्घटना – गोरखपुर इन्सेफेलाइटिस प्रभावी क्षेत्र है। पहली इन्सेफेलाइटिस महामारी, यहाँ १९७८ में फैली थी। १९७८-२०११ के दौरान, इन्सेफेलाइटिस मरीज़ो का इलाज करने में बी. आर. डी. मेडिकल कॉलेज का बहुत बड़ा हाथ था। गोरखपुर में इन्सेफेलाइटिस के मरीज़ो में अब भारी गिरावट आ रही है।

बी. आर. डी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर के आसपास के १५ जिलों के मरीजों की सेवा करता है। यह इन्सेफेलाइटिस के इलाज के लिए एक प्रमुख केंद्र है, एक ऐसी बीमारी जिसका गोरखपुर क्षेत्र में बारिश के मौसम के दौरान नियमित प्रकोप देखा गया है। मरीज़, विशेषकर ग़रीब, कई पड़ोसी जिलों, बिहार और पड़ोसी देश नेपाल से आते हैं।

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