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पश्चिमी सीमा पर एंटी-ड्रोन सिस्टम | Anti Drone Technology

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Anti Drone System

भाईसाब, देश की पश्चिमी सीमा के जरिये पाकिस्तान नशीले पदार्थों की तस्करी करवाता है, ये भारत सरकार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है, लेकिन अब इस पर नकेल कसने की तैयारी भी शुरु हो चुकी है, आपको बता दें कि पंजाब में हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी में सीधे तौर पर पाकिस्तान के लोग शामिल हैं और इसके लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं, और अब इन ड्रोन को रोकने के लिए सरकार ने नई योजना बनाई है,बता दें कि सरकार 6 महीने में देश की पश्चिमी सीमा पर एक पूरी तरह स्वदेशी एंटी-ड्रोन प्रणाली स्थापित करने की तैयारी में है।

आतंकी गुट बहुत तेजी से टेक्नोलॉजिकल प्रगति को अपनाते जा रहे हैं,इनसे मुकाबला करने के लिए भारत के सैन्य व पुलिस बलों को भी प्रभावी ड्रोन-रोधी टेक्नोलॉजी से लैस करना होगा ताकि वे ‘सॉफ्ट-किल’ व ‘हार्ड-किल’ में सक्षम हो जायें। ‘सॉफ्ट-किल’ का अर्थ है जैमिंग व स्पूफिंग सिस्टम्स के जरिये इस प्रकार के ड्रोनों के सैटेलाइट या वीडियो कमांड-एंड-कंट्रोल लिंक को तोड़ दिया जाये और वहीं ‘हार्ड-किल’ के जरिये लेजर-आधारित डायरेक्टिड एनर्जी वेपन्स यानी DEW से ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया जाये। भाईसाब, आपको बताना जरूरी है कि DRDO ने दो एंटी-ड्रोन DEW सिस्टम्स विकसित किये हैं, एक 10 किलोवाट लेजर का है, जो हवा में 2 किमी के फासले तक वार कर सकता है और दूसरा 2 किलोवाट लेजर का है, जिसकी रेंज एक किमी की है और इसे ट्राईपोड के जरिये भी इस्तेमाल किया जा सकता है, इन दोनों सिस्टम्स का बड़ी संख्या में उत्पादन करना जरूरी है, इजराइल से आयात किये गए ‘स्मैश-200 प्लस’ के साथ, जिसे राइफल पर चढ़ाकर दिन व रात में दुश्मन ड्रोनों को नष्ट किया जा सकता है। भाईसाब, आपकी जानकारी देना जरूरी है कि, जब 2019 के मध्य में ड्रोन के जरिये पंजाब व जम्मू-कश्मीर में ड्रग्स व हथियार गिराये गए थे और पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने केंद्र से इन घटनाओं को रोकने के लिए कठोर कदम उठाने की मांग भी की थी, तभी यह समझ में आ जाना चाहिए था कि सुरक्षित फासले से ड्रोन का प्रयोग आतंकी हमला करने के लिए भी किया जा सकता है। आपको बता दें कि 27 जून 2021 की सुबह जम्मू एयरपोर्ट में आईएएफ स्टेशन पर संदिग्ध क्वैडकॉप्टर से IED गिराये गए थे। भारत में ड्रोन से यह पहला हमला था। भाईसाब, ये भी जान लें कि 1 नवंबर, 2022 और 31 अक्टूबर, 2023 के बीच सुरक्षा बलों द्वारा 90 ड्रोन बरामद किए गए, जिनमें पंजाब में 81 और राजस्थान में 9 ड्रोन मिले थे। वहीं पिछले साल ड्रोन देखे जाने की संख्या 300-400 तक बढ़ गई है। हालांकि हैंडहेल्ड स्टैटिक और वाहन-माउंटेड एंटी-ड्रोन सिस्टम का उपयोग करके निगरानी बढ़ाने के बाद से पाकिस्तान से नशीली दवाओं की खेप ले जाने वाले तस्करों को हाल ही में बीएसएफ को चकमा देना मुश्किल हो रहा है। इनकी तैनाती के बाद तस्करों को रणनीति बदलने पर मजबूर होना पड़ा है। जैसे कि पंजाब में निगरानी के लिए राजस्थान मार्ग का उपयोग करना, लेकिन एक खुफिया लीक के बाद राजस्थान में चार खेप जब्त होने के बाद उन्होंने हार मान ली। तस्करों ने ड्रोन को ऊंचाई पर भेजने की भी कोशिश की लेकिन उन्हें पकड़ने के लिए बीएसएफ निगरानी प्रणाली को अपडेट किया गया।

चलते-चलते, भाईसाब, बता दें कि हाल ही में तस्कर 750 ग्राम वजन के हल्के पेलोड के साथ छोटे ड्रोन उड़ा रहे हैं। पाकिस्तान से उड़ाए जाने वाले अधिकांश ड्रोन चीनी निर्मित होते हैं, क्योंकि वे आसानी से उपलब्ध होते हैं और तुर्की या ईरान की तुलना में सस्ते होते हैं। छोटे ड्रोनों को किसी बिल्डिंग की बालकनी से भी लांच किया जा सकता है और इनकी फ्लाइंग रेंज 4-5 किमी की होती है, जिससे इन्हें राडार के जरिये पकड़ना कठिन हो जाता है। सीमा पर एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात करने के साथ-साथ इन छोटे ड्रोन्स को नष्ट करने की व्यवस्था करना भी जरूरी है, भारत सरकार अगले 6 माह के भीतर देश की पश्चिमी सीमा पर एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात कर देगी।

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