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देश में बढ़ गया बाल विवाह का ग्राफ | Alarming Rise in Child Marriage Cases

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Alarming Rise in Child Marriage Cases

भाईसाब, हैरानी होती है कि आजादी के 76 वर्ष बाद भी बाल विवाह जैसी कुप्रथा का अंत नहीं हो पाया है, बाल विवाह के खिलाफ सख्त कानून हैं फिर भी कुछ राज्यों में कम उम्र में बच्चों की शादी कर दी जा रही है, हालांकि, ऐसा नहीं है कि पहले से सुधार नहीं हुआ है, देशभर में पिछले दशकों में तुलना में आंकड़ा कम हुआ है मगर कुछ राज्यों में ग्राफ बढ़ा भी है, हालिया रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, 1993 से 2021 के बीच बचपन में लड़कियों की शादी की संख्या में 50 लाख की कमी आई है, मगर ये भी बताया गया है कि चार राज्य ऐसे हैं जिनका देश की कुल संख्या में 50 फीसदी हिस्सेदारी है.

2021 में लड़कियों के बाल विवाह में बिहार की सबसे ज्यादा हिस्सेदारी 16.7 फीसदी थी, इसके बाद पश्चिम बंगाल की 15.2 फीसदी, उत्तर प्रदेश की 12.5 फीसदी और महाराष्ट्र की 8.2 फीसदी थी, वहीं लड़कों के बाल विवाह की बात करें तो गुजरात का सबसे ज्यादा हिस्सा 29 फीसदी था, इसके बाद बिहार का 16.5 फीसदी, बंगाल का 12.9 फीसदी और उत्तर प्रदेश का 8.2 फीसदी हिस्सा था. यानी कि बचपन में शादी करने वाले लड़कों में इन्हीं 4 राज्यों का 60 फीसदी हिस्सा है. भाईसाब, आंकड़े बताते हैं सबसे ज्यादा बाल विवाह के मामले लड़कियों के साथ देखने को मिलते हैं, ज्यादातर लड़कियों की बालिग होने से पहले ही शादी कर दी जाती है, ऐसा करना अनैतिक, गैर-जिम्मेदार और नैतिकता के खिलाफ है, इससे बच्चों का बचपन तो छिनता ही है, लड़कियों को जिंदगीभर मानसिक और शारीरिक समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है, कम उम्र में मां बनना लड़कियों के लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है. भाईसाब, रिपोर्ट के अनुसार 1993 में 49.4 फीसदी लड़कियों का बाल विवाह हो रहा था, 2021 में यह आंकड़ा घटकर 22.3 प्रतिशत रह गया, वहीं लड़कों के बाल विवाह में भी कमी देखने को मिली, 2006 के 7.1 फीसदी से घटकर 2021 में 2.2 फीसदी हो गया, अनुमान है कि 2021 में लड़कियों के बाल विवाह की कुल संख्या 1 करोड़ 34 लाख 64 हजार 450 थी, वहीं लड़कों का आंकड़ा 14 लाख 54 हजार 894 रहा था. भाईसाब, आपको मालूम होना चाहिए कि 1993 के मुकाबले 2021 में 50 लाख 19 हजार कम लड़कियों के बाल विवाह हुए, लेकिन सात राज्य ऐसे भी हैं जहां पहले से संख्या बढ़ी है, ये राज्य हैं- झारखंड, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, गोवा, असम, मणिपुर और बिहार. संख्या के हिसाब से सबसे ज्यादा 5 लाख मामले पश्चिम बंगाल में बढ़े, यहां 1993 में 15.50 लाख लड़कियों के बाल विवाह करने का अनुमान है, वहीं 2021 में ये आंकड़ा बढ़कर 20.50 लाख पहुंच गया. रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में 1993 में 3.52 लाख लड़कियों का बचपन में ही विवाह कर दिया गया था, 2021 में ये आंकड़ा बढ़कर 5.39 लाख हो गया, संख्या के हिसाब से 28 साल बाद सबसे ज्यादा गिरावट हिमाचल प्रदेश, केरल, नगालैंड, छत्तीसगढ, हरियाणा, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश में हुई. भाईसाब, मणिपुर एकमात्र राज्य जहां 28 साल बाद मामले बढ़े, मणिपुर के अलावा सभी राज्यों में 1993 से 2021 के बीच लड़कियों के बाल विवाह में प्रतिशत के हिसाब से गिरावट देखी गई है, 1993 से 1999 के बीच 20 फीसदी 30 में से 6 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बढ़ोतरी हुई, 1999 से 2006 के बीच 50 फीसदी 30 में से 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मामले बढ़े, 2006 से 2016 के बीच लड़कियों में बाल विवाह में तेजी से गिरावट आई. मणिपुर एकमात्र राज्य था जहां 1993 के मुकाबले 2021 में लड़कियों के बाल विवाह का प्रतिशत बढ़ा, मगर 1999 से 2016 के बीच पहले यहां भी कमी देखने को मिली थी, 2016 से 2021 के बीच 36 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में से छह में लड़कियों के बाल विवाह के मामले बढ़े, ये राज्य हैं- मणिपुर, मेघालय, पंजाब, त्रिपुरा, बंगाल, दादर एंड नागर. भाईसाब, बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के अनुसार, दोषी पाए जाने पर दो साल की जेल और एक लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है. अगर लड़का बालिग होते हुए नाबालिग लड़की से शादी करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है. यही नहीं, अगर बाल विवाह करवाने वाला कोई रिश्तेदार या मित्रगण भी दोषी पाया जाता है तो उसे भी दो साल जेल और 1 लाख का जुर्माना देना पड़ सकता है, इसके अलावा अदालत के पास ऐसी शादी को ‘शून्य’ घोषित करने का भी अधिकार होता है, लड़का या लड़की खुद भी कोर्ट जाकर ऐसी शादी को रद्द करने की अर्जी दे सकते हैं, वहीं अगर दोनों चाहें तो बालिग होने पर कोर्ट जाकर अपने बाल विवाह पर मान्यता प्राप्त कर सकते हैं. भाईसाब, ये जानना जरूरी है कि, क्या है बाल विवाह की वजह? तो बता दें कि भारत में पढ़े लिखे लोगों की संख्या पहले काफी इजाफा हुआ है, 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में साक्षरता दर 74 फीसदी पर पहुंच गई है, इसके बावजूद बाल विवाह के मामले थमे नहीं है, बाल विवाह के कई कारण हो सकते हैं, जैसे- सोचने समझने की क्षमता में कमी, गरीबी, पुरानी परंपरा मानना आदि. पहले के समय में ज्यादातर लोग लड़कियों के जल्दी से जल्दी हाथ पीले कर देने पर विश्वास करते थे, आज भी कुछ लोग ये परंपरा मान रहे हैं.

चलते-चलते भाईसाब, बताते चलें कि पीढ़ी दर पीढ़ी बाल विवाह का प्रचलन रहा है, ग्रामीण इलाकों में कुछ परिवार ये डर भी रहता है कि कहीं उनकी लड़की बड़ी होकर किसी गलत रास्ते पर न चली जाए, इस डर का उन्हें एकमात्र उपाय जल्द से जल्द शादी कर देना ही दिखता है, कई बार बड़े-बुजुर्ग को ये कहते भी सुना जा सकता है कि वो जीते जी अपने घर के बच्चों की शादी देखना चाहते हैं, इसका प्रभाव ये होता है कि नाबालिग उम्र में ही बच्चों की शादी कर दी जाती है.

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