Home Latest ‘वर्तमान के वर्धमान’ आचार्य विद्यासागर महाराज | Acharya Vidyasagar Maharaj

‘वर्तमान के वर्धमान’ आचार्य विद्यासागर महाराज | Acharya Vidyasagar Maharaj

0 comment
Acharya Vidyasagar Maharaj

भाईसाब, क्या आपको पता है, हाल ही में 18 फरवरी को मध्यप्रदेश में राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ के चंद्रगिरी में जैन आचार्य विद्यासागर महाराज ने समाधि ली, दिगंबर मुनि परंपरा के आचार्य विद्यासागर महाराज ने छत्तीसगढ़ के चन्द्रगिरि तीर्थ में अपना शरीर त्याग दिया था, पूर्ण जागृतावस्था में उन्होंने आचार्य पद का त्याग करते हुए 3 दिन का उपवास लिया था और अखंड मौन धारण कर लिया था, जिसके बाद उन्होंने प्राण त्याग दिए, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आचार्य विद्यासागर महाराज कौन थे और पीएम मोदी इनके परम भक्त भी थे।

नमस्कार, भाईसाब, एक ज्ञान की बात आपको बताते हैं, धर्म को जानने से अधिक महत्व धर्म को समग्रता से जीने में है, विद्यासागर महाराज ने यही किया तभी तो वे ‘वर्तमान के वर्धमान’ कहलाए, कठोर नियम-संयम, तपस्या, असाधारण विद्वत्ता, गहन आध्यात्मिक अंतदृष्टि व अनुशासित जीवन के कारण उनके प्रति न केवल जैन बल्कि अन्य धर्मों के लोगों के मन में भी असीम श्रद्धा थी, वे सभी के लिए परम आदरणीय रहे हैं, इस अत्यंत प्राचीन जैन धर्म के 24 तीर्थकरों की सीख को विद्यासागर महाराज ने अपने जीवन में परिपूर्णता से चरितार्थ कर दिखाया। भाईसाब, आपको बताना जरूरी है कि उनकी समाधि की खबर सुनकर पीएम मोदी ने एक ट्वीट करते हुए लिखा कि आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज के अनगिनत भक्त हैं, आने वाली पीढ़ियां उन्हें समाज में उनके अमूल्य योगदान के लिए याद रखेंगी, आध्यात्मिक जागृति के उनके प्रयासों, गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और अन्य कार्यों के लिए उन्हें याद रखा जाएगा। भाईसाब, विद्यासागर महाराज जैन धर्म के एक महान संत और समाज सुधारक थे, 10 अक्टूबर, 1946 को कर्नाटक के सदलगा में जन्मे, उन्होंने छोटी उम्र से ही आध्यात्मिकता को अपना लिया और 21 साल की उम्र में राजस्थान के अजमेर में दीक्षा लेने के लिए सांसारिक जीवन त्याग दिया था, विद्यासागर का बचपन का नाम विद्याधर था, भाईसाब, आपको हैरानी होगी जानकर, संस्कृत, प्राकृत और कई आधुनिक भाषाओं में उनकी महारत ने उन्हें कई व्यावहारिक कविताएं और आध्यात्मिक ग्रंथ लिखने में सक्षम बनाया था, निरंजना शतक, भावना शतक, परिषह जया शतक, सुनीति शतक और श्रमण शतक सहित उनके कार्यों का जैन समुदाय के भीतर व्यापक रूप से अध्ययन और सम्मान किया जाता था, उन्होंने काव्य मूक माटी की भी रचना की थी, जिसको कई संस्थानों में पोस्ट ग्रेजुएशन के हिन्दी पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाता है। भाईसाब, आचार्य विद्यासागर महाराज का प्रभाव आध्यात्मिकता के दायरे से कहीं आगे तक फैला हुआ था, उन्होंने भारत के बुन्देलखण्ड क्षेत्र में शिक्षा और सामाजिक कल्याण पहलों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, उनके प्रयासों से स्कूलों, अस्पतालों और सामुदायिक केंद्रों की स्थापना हुई, जिससे अनगिनत व्यक्तियों के जीवन में बदलाव आया और उनका उत्थान हुआ।

भाईसाब, उनका बाल्यकाल आश्चर्यकारी घटनाओं से भरा रहा था, खेलने-कूदने की उम्र में वे माता-पिता के साथ मन्दिर जाया करते थे, धर्म-प्रवचन सुनना, शुद्ध सात्विक आहार करना, मुनि आज्ञा से संस्कृत के कठिन सूत्र एवं पदो को कंठस्थ करना, धीरे-धीरे उनके जीवन का हिस्सा बन गया था, उनकी यही आदतें आध्यात्म मार्ग पर चलने का संकेत दे रही थीं, पढ़ाई हो या होमवर्क, सभी को अनुशासित और क्रमबद्ध तौर पर पूरा करके ही संतुष्ट होते थे। इसेक अलावा बचपन से ही मुनि-चर्या को देखने, उसे स्वयं आचरित करने की भावना से ही बावडी में स्नान के साथ पानी में तैरने के बहाने आसन और ध्यान में बैठ जाते थे, मन्दिर में विराजित मूर्ति के दर्शन के समय उसमे छिपी विराटता को जानने का प्रयास करते थे, भाईसाब, एक बार उन्हें बिच्छु ने काट लिया था, लेकिन असहनीय दर्द होने पर भी वह रोए नहीं बल्कि उसे नजरअंदाज कर दिया, इतना ही नहीं पीड़ा सहते हुए भी उन्होंने अपनी दिनचर्या में शामिल धार्मिक-कार्यों के साथ ही सभी कार्य वैसे ही किए जैसे हर दिन नियम से करते थे.

चलते-चलते, भाईसाब, बताते चलें कि विद्यासागर ने त्याग, तपस्या और कठिन साधना के मार्ग पर चलते हुए महज 22 साल की उम्र में 30 जून 1968 को अजमेर में आचार्य ज्ञानसागर महाराज से मुनि दीक्षा ली थी, गुरुवर ने उन्हें उनके नाम विद्याधर से मुनि विद्यासागर की उपाधि दी थी और कालांतर में गुरुवर ने आचार्य की उपाधि देकर उन्हें आचार्य विद्यासागर का दर्जा दिया था, गुरुवर के समाधि लेने के बाद वह जैन समुदाय के संत बने, लोगों का मानना है कि गृह त्याग के बाद से ठंड, बरसात और गर्मी से विचलित हुए बिना आचार्य ने कठिन तप किया था और उनका त्याग, तपस्या और तपोबल ही था कि जैन समुदाय ही नहीं बल्कि सारी दुनिया उनके आगे नतमस्तक है, जिनमें देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी शामिल हैं.

banner

You may also like

bhaisaab logo original

About Us

भाई साब ! दिल जरा थाम के बैठिये हम आपको सराबोर करेंगे देशी संस्कृति, विदेशी कल्चर, जलेबी जैसी ख़बरें, खान पान के ठेके, घुमक्कड़ी के अड्डे, महानुभावों और माननीयों के पोल खोल, देशी–विदेशी और राजनीतिक खेल , स्पोर्ट्स और अन्य देशी खुरापातों से। तो जुड़े रहिए इस देशी उत्पात में, हमसे उम्दा जानकारी लेने और जिंदगी को तरोताजा बनाए रखने के लिए।

Contact Us

Bhaisaab – All Right Reserved. Designed and Developed by Global Infocloud Pvt. Ltd.