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कतर में फंसे 8 नेवी अफसरों की बची जान ! | Qatar Diplomacy | 8 Navy Officers in Qatar

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8 Navy Officers in Qatar

भाईसाब, क्या आपको पता है, एक बार फिर भारत ने दुनियाभर में अपने कूटनीतिक जीत का डंका बजवा दिया है। भारत सरकार की सूझबूझ और बेहतर रणनीति को कारण कतर में मुश्किल में फंसे 8 भारतीय पूर्व नौसैनिकों की जान बच गई है। भारत-कतर में तल्खी होने के बावजूद 8 भारतीयों की फांसी की सजा को को कम कर दिया गया है, इसे भारत की बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है।

भाईसाब, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कुछ माह पूर्व कतर की एक अदालत ने 8 पूर्व भारतीय नौसैनिकों को फांसी की सजा सुनाई थी जिससे पूरे देश में कोहराम मच गया था। जिन लोगों को इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी, मृत्यु दंड पाए लोगों के बारे में नहीं जानते थे, वे भी चिंतित हो उठे। सवाल भी उठे कि भारत सरकार इन्हें कैसे बचाएगी? क्या रास्ता निकलेगा? क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद हस्तक्षेप करेंगे या विदेश मंत्री एस जयशंकर की देखरेख में भारतीय दूतावास के अधिकारी प्रयास करेंगे? विदेश मंत्रालय ने इस बारे में सिर्फ यह कहा था कि वे अपने नागरिकों को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे और अब लगभग दो महीने बाद यह खबर आई कि कतर की ऊपरी अदालत ने फांसी की सजा को रद्द करते हुए जेल काटने की सजा मुकर्रर की है तो सजा पाए भारतीयों के परिवारों से लेकर आम भारतवासी भी राहत की सांस ले पा रहे हैं। हालांकि, अभी सिर्फ इतनी ही सूचना आम हुई है कि फांसी की सजा टल गई है। अब इन कैदियों को केवल जेल में रहना होगा। कितने दिन जेल में काटने होंगे, इसका खुलासा होना अभी बाकी है? भारत सरकार ने जिस तरीके से इस मामले को उठाया है, वह काबिल-ए-तारीफ है। कोई शोर-शराबा नहीं, केवल न्यायोचित और कूटनीतिक तरीके अपनाए गए और परिणाम सामने है। करीब सवा साल से भी ज्यादा समय से सभी आठों पूर्व नौसैनिक कतर की हिरासत में हैं। तब से लेकर आज तक भारत सरकार ने उन्हें कॉन्सुलर एक्सेस दिया यानी दूतावास के जरिये सहायता प्रदान की गई। कतर में भारत के राजदूत खुद मिलते रहे। परिवारों के सदस्यों को भी मुलाकात से लेकर फोन पर बात करने की सुविधा उपलब्ध कारवाई। यह सब कूटनीति का हिस्सा था। जब निचली अदालत ने इन बंदियों को फांसी की सजा सुना दी तो भारत सरकार की कार्यवाही और कार्रवाई, दोनों पर लोग सवाल उठाने लगे। पर, कूटनीति शायद ऐसे ही होती है। भारत सरकार ने इस केस से जुड़ी हर छोटी-बड़ी सूचना से देश को समय-समय पर अवगत कराया लेकिन स्टेप बाय स्टेप जानकारी नहीं दी वैसे यह समय की मांग थी पर, प्रयासों में कोई कमी नहीं रखी, यह भी स्पष्ट दिखाई दे रहा था।

भाईसाब पहले थोड़ा पीछे चलते हैं। तारीख, 4 जून 2016, कतर में प्रधानमंत्री मोदी का पहला दौरा था। जहां उन्होंने प्रवासी भारतीयों के बीच कतर के अमीर के बारे में जो कुछ कहा वह आज सभी को जानना चाहिए। पीएम मोदी ने तब कहा था कि, ‘यहां के शासन कर्ता भी भारतीय समुदाय को बहुत प्यार करते हैं। उन पर बड़ा भरोसा है। मुझे विश्वास है हम जब भी कोई चीज उनके सामने रखते हैं, तो वे उसका समाधान खोजते ही हैं। अबतक जो भी मैंने कहा है उसका मुझे सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुआ है। कतर ने 8 भारतीयों की फांसी की सजा को कम कर दिया। 2 दिसंबर 2023 को दुबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी की मुलाकात हुई। इसके अगले ही दिन 3 दिसंबर को कतर ने जेल में बंद 8 भारतीयों से भारतीय राजदूत को मिलने दिया और इसके 26 दिन बाद सभी 8 भारतीयों की फांसी की सजा को कम कर दिया गया। सवाल ये है कि क्या पर्दे के पीछे से कतर को साधने की कोशिश की जा रही थी और क्या इसीलिए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 30 अक्टूबर को भरोसा दिलाया कि ये मामला सरकार की प्राथमिकताओं में शुमार है। भाईसाब, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कतर ने भारत के आठ पूर्व नौसैनिकों को 30 अगस्त 2022 की रात को उठा लिया और उन्हें दोहा की एक जेल में बाक़ी क़ैदियों से अलग रख दिया गया। इन भारतीयों में तीन रिटायर्ड कैप्टन, चार कमांडर और एक नाविक शामिल थे।

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भाईसाब, अब सवाल उठता है, कतर में बंद सभी भारतीय भले ही मौत के चंगुल से छूट गए हों। लेकिन क्या इनकी वापसी संभव है ? इस सवाल का जवाब सकारात्मक है। 2 दिसंबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट ने भारत और कतर के बीच सजायाफ्ता व्यक्तियों के स्थानांतरण संधि को मंजूरी दी थी। जिसके बाद मार्च 2015 में दोनों देशों के बीच संधि पर हस्ताक्षर हुए थे। इस संधि के बाद से कतर में सजा पाए भारतीय कैदी अपनी बची सजा भारत में पूरी कर सकते हैं और अगर कतर का कोई नागरिक भारत में सजा भुगत रहा है तो वो अपने देश में उस सजा की अवधी को पूरा कर सकता है।

चलते-चलते, भाईसाब आपको बता दें कि कतर ने भले ही आधी रात 8 भारतीयों को पकड़ कर जेल में डाला। लेकिन इसके बाद जिस तरह से दोनों के बीच कूटनीतिक बातचीत चलती रही उससे 8 भारतीयों के कतर से लौटने की उम्मीद मजबूत होती है।

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