Home Latest 70 घंटे कर्म करने की प्रेरणा…| 70 Hrs Work Inspiration |

70 घंटे कर्म करने की प्रेरणा…| 70 Hrs Work Inspiration |

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भाईसाब, द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने अर्जुन को कर्म की प्रेरणा दी थी। अब कलियुग में नारायण ने असीम अनुकंपा करते हुए जन-जन को सप्ताह में 70 घंटे कर्म करने के लिए प्रेरित किया है। इन्फोसिस के फाउंडर नारायण मूर्ति की कोशिश है कि लोगों में काम करने की कशिश पैदा हो। नारायण मूर्ति का कहना है कि जब देश का युवा हफ्ते में 70 घंटे काम करेगा, तब भारत उन अर्थव्यवस्थाओं का मुकाबला कर सकेगा, जिन्होंने पिछले दो से तीन दशकों में कामयाबी हासिल की है। उन्होंने कहा कि भारत की वर्क प्रोडक्टिविटी दुनिया में सबसे कम है, जबकि हमारा सबसे ज्यादा मुकाबला चीन से है, इसलिए युवाओं को ज्यादा काम करना होगा। हालांकि, उनके ये ’70 घंटे वाले फॉर्मूले’ पर बहस भी शुरू हो गई है। राय भी बंटी हुई है। भाईसाब, आज के इस लेख में हम इन्फोसिस के फाउंडर नारायण मूर्ति के ’70 घंटे वाले फॉर्मूले’ पर अंदर छिपे विकास के रहस्यों के विषय को लेकर आएं हैं, थोड़ा नमक-थोड़ी मिर्ची वाले इस बहस का आप भी आनंद लीजिए।

भाईसाब, ये आपको बताना जरूरी है कि कर्मचारी आलस्य त्याग कर 70 घंटे कर्म करें तो देश जल्दी ही महाशक्ति और बहुत बड़ी इकोनामी बन जाएगा। नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने कहा था- तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा। नारायणमूर्ति किसी का खून नहीं बल्कि सिर्फ 70 घंटे मांग रहे हैं। भाईसाब, नारायण मूर्ति अकेले ऐसे उद्योगपति नहीं हैं, जो हफ्ते में इतने ज्यादा घंटों तक काम करने की बात कर रहे हैं। उनसे पहले चीनी कारोबारी और अलीबाबा के फाउंडर जैक मा ने ‘9-9-6 रूल’ की बात कही थी। उनके मुताबिक, हफ्ते में 6 दिन सुबह 9 बजे से रात के 9 बजे तक काम करना चाहिए। वैसे आपको बता दें कि लेबर कोड में काम के घंटे तय हैं। मौजूदा समय में हर दिन 8 घंटे काम करने की सीमा तय है। यानी, हर हफ्ते 48 घंटे। फिर भी भाईसाब, आपको पता है दुनिया में भारत उन देशों में शामिल है, जहां के लोग हफ्ते में सबसे ज्यादा घंटे काम करते हैं। इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में भी काम के घंटों की सीमा 48 घंटे ही तय है। लेकिन भूटान, कॉन्गो, कतर, यूएई और गाम्बिया ही ऐसे हैं जहां काम करने की सीमा भारत से ज्यादा है यानी, भारत उन देशों में है, जहां के लोग हफ्ते में सबसे ज्यादा काम करते हैं। हफ्ते में सबसे ज्यादा घंटों तक काम संयुक्त अरब अमीरात के लोग करते हैं। यहां हर वर्कर हफ्ते में औसतन 52।6 घंटे काम करता है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में हर वर्कर हफ्ते में औसतन 46 घंटे काम करता है। वहीं, अमेरिका में 37 घंटे जबकि यूके और इजरायल में 36 घंटे ही काम करता है। 2022-23 के पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे के नतीजों के मुताबिक, देश में सैलरीड क्लास और रेगुलर वेज के कर्मचारी हफ्ते में 48 घंटों से ज्यादा काम करते हैं। नतीजे बताते हैं कि गांव हो या शहर, दोनों ही जगह महिलाओं की तुलना में पुरुष ज्यादा काम करते हैं। अपना खुद का काम करने वाले लोग हफ्ते में 41 घंटे से भी कम काम करते हैं। वहीं, सैलरी या दिहाड़ी लेने वाले कर्मचारी 49 घंटे से ज्यादा काम करते हैं। जबकि, केजुअल लेबर हफ्ते में 40 घंटे काम करते हैं। नतीजे ये भी बताते हैं कि शहर में खुद का काम करने वाले लोग गांव की तुलना में 10 घंटे ज्यादा काम करते हैं। गांव में खुद का काम करने वाला हर व्यक्ति औसतन 39 घंटे काम करता है। वहीं, शहर में खुद का काम संभालने वाला व्यक्ति 49 घंटे काम करता है।
भाईसाब, ये भी जान लेना जरूरी है कि लोग अल्कोहलिक बन कर स्वास्थ्य खराब करते हैं, उन्हें वर्कोहलिक बन जाना चाहिए। उनपर लगातार काम करने का नशा सवार हो जाए तो देखते ही देखते ‘मेरा भारत महान बन जाए’। भाईसाब, किसी ने एक तंज कसा है, यदि फैक्ट्री वर्कर हफ्ते में 70 घंटे काम करेंगे तो हम चीन के समान भरपूर प्रोडक्शन करेंगे। उसके एक्सपोर्ट को दुनिया के सारे बाजार डम्प कर देंगे। इससे प्रचुर मात्रा में विदेशी मुद्रा आएगी और देश संपन्नतम हो जाएगा। ज्यादा काम करेंगे तो प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी। लेकिन क्या वाकई ऐसा होता है?भाईसाब, रिसर्च तो इस बात को खारिज करती हैं। रिसर्च बताती हैं कि अगर हफ्ते में कोई व्यक्ति 50 घंटे से ज्यादा काम कर रहा है तो तय है कि उसकी प्रोडक्टिविटी कम होने लगेगी। वहीं, अगर काम के ये घंटे 55 घंटे से ज्यादा होते हैं तो फिर प्रोडक्टिविटी काफी कम हो जाती है। इतना ही नहीं, हफ्ते में कम से कम एक दिन छुट्टी नहीं मिलने से भी प्रोडक्टिविटी पर असर पड़ता है। वहीं, एक रिसर्च में ये भी सामने आया है कि दिन में पांच घंटे काम करना ज्यादा फायदेमंद है। क्योंकि किसी भी व्यक्ति की पांच घंटे सबसे ज्यादा प्रोडक्टिविटी होती है। पांच घंटे लोग अपने काम पर ज्यादा फोकस कर पाते हैं।
तो भाईसाब दूसरा तंज ये भी कसा गया है जो देश की हकीकत को बयां करता है, ‘‘यदि जज और वकील 70 घंटे काम करें तो सारे बकाया मामले निपट जाएंगे। सफाई कर्मी 70 घंटे सड़क झाड़े तो कचरे का एक तिनका भी नजर नहीं आएगा। इतने समय क्लर्क और आफिसर काम करने लगें तो फाइलों का पूरा अंबार क्लीयर हो जाएगा।’’ इतना ही नहीं भाईसाब, कोई प्रोफेसर दिन में सिर्फ 4 पीरियड पढ़ाने की बजाय हफ्ते में 70 घंटे पढ़ाए तो कोर्स झटपट पूरा हो सकता है।’’ और भाईसाब, ‘‘लोगों को रोज 6 से 7 घंटे की नींद, नहाने-धोने, चाय-नाश्ता करने और खाने पीने के लिए भी तो समय चाहिए। उन्हें वॉक करने, व्यायाम करने, परिवार और मित्रों के लिए भी तो समय चाहिए। बीमार पड़े तो छुट्टी भी लेनी पड़ेगी। इंसान कभी रोबोट नहीं बन सकता। लोग अधिक समय काम करने का अधिक पैसा भी मांगेंगे।’’
भाईसाब, आपके लिए खास बात है जो बड़े काम की है, ये जान लें कि धर्म सिखाता है कि कर्म करो, फल की आशा मत करो। काम करोगे, व्यस्त रहोगे तो स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। अपने काम को बोझ न समझते हुए हॉबी के रूप में करो तो वह आनंददायी बन जाएगा। तो भाईसाब, ये थी जानकारी 70 घंटे काम को लेकर, आशा करते हैं यह जानकारी आपको जरूर पसंद आई होगी, ऐसी ही अन्य रोचक जानकारी के लिए जुड़े रहें भाईसाब के साथ, धन्यवाद!

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