Home Mahanubhav भारत की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाले डॉ मनमोहन सिंह | 13th Prime Minister Of India

भारत की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाले डॉ मनमोहन सिंह | 13th Prime Minister Of India

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13th Prime Minister Of India

भाईसाब, आपको बताते हुए हर्ष होता है कि, भारत की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाले देश के पूर्व प्रधानमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉक्टर मनमोहन सिंह 91 साल के हो चुके है. आपकी जानकारी के बता दें कि मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर 1932 को अविभाजित भारत में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में हुआ था। वह 2004-2014 तक यूपीए सरकार में बतौर प्रधानमंत्री पद पर कार्यरत रहे। प्रधानमंत्री बनने से पहले वह 1991 में नरसिम्हा राव की सरकार में वित्त मंत्री भी रह चुके हैं। मनमोहन सिंह को हाल ही में संसद में पेश हुए अविश्वास प्रस्ताव की वोटिंग प्रक्रिया के दौरान व्हील चेयर पर देखा गया था। उनके परिवार में उनकी पत्नी श्रीमती गुरशरण कौर और तीन बेटियां हैं।

डॉ मनमोहन ने देश में हुए आर्थिक सुधारों में अहम रोल निभाया था। साल 1991 में पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में वित्त मंत्री रहते हुए उन्होंने बजट के दौरान उदारीकरण, निजीकरण और वैश्विकरण से जुड़ी अहम घोषणाएं की, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिल सकी। इसके चलते देश में व्यापार नीति, औद्योगिक लाइसेंसिंग, बैंकिंग क्षेत्र में सुधार और प्रत्यक्ष विदेश निवेश की अनुमति से जुड़े नियम-कायदों में बदलाव किए गए। भाईसाब, अगर उनके राजनीतिक सफर की बात करें तो 1991 में मनमोहन सिंह को असम का राज्यसभा सदस्य चुने गए। इसके बाद वर्ष 1995, 2001, 2007 और 2013 में फिर राज्यसभा सांसद रहे। जब 1998 से 2004 तक जब भाजपा सत्ता में थी, तब मनमोहन सिंह राज्यसभा में विपक्ष के नेता थे। 1999 में उन्होंने दक्षिणी दिल्ली से चुनाव लड़ा लेकिन उन्हे जीत हासिल नहीं की। वर्ष 2004 में कांग्रेस जैसे ही सत्ता में आई तो उन्हें प्रधानमंत्री बना दिया गया। साल 2009 में फिर से कांग्रेस सत्ता में आई और एक बार फिर डॉ सिंह को ही प्रधानमंत्री बनाया गया। भाईसाब, 2004 से 2014 तक लगातार 10 साल देश के पीएम रहे मनमोहन सिंह ने 1991 में जब देश के वित्त मंत्री का पद संभाला था तब आर्थिक क्रांति ला दी थी. उन्होंने ही ग्लोबलाइजेशन की शुरूआत की थी. 1991 से 1996 के बीच उनके द्वारा किए गए आर्थिक सुधारों की जो रूपरेखा, नीति और ड्राफ्ट तैयार किया गया, उसकी दुनिया भर में प्रशंसा की जाती है. मनमोहन सिंह ने आर्थिक उदारीकरण को बाकायदा एक ट्रीटमेंट के तौर पर पेश किया. भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व बाजार से जोड़ने के बाद उन्होंने आयात और निर्यात के नियम भी सरल किए. लाइसेंस और परमिट गुजरे वक्त की बात होकर रह गई. घाटे में चलने वाले पीएसयू के लिए अलग से नीतियां बनाईं.

भाईसाब, बेरोजगारी से जूझते देश में रोजगार गारंटी योजना की सफलता का श्रेय मनमोहन सिंह को जाता है. इसके तहत बता दें कि साल में 100 दिन का रोजगार और न्यूनतम दैनिक मजदूरी 100 रुपये तय की गई. इसे राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम कहा जाता था, लेकिन 2 अक्टूबर 2009 को इसका फिर से नामकरण किया गया. इसकी खास बात यह भी है कि इसके तहत पुरुषों और महिलाओं के बीच किसी भी भेदभाव की अनुमति नहीं है. इसलिए, पुरुषों और महिलाओं को समान वेतन भुगतान किया जाना चाहिए. सभी वयस्क रोजगार के लिए आवेदन कर सकते हैं. इसके अलावा, भाईसाब, आधार योजना का भी श्रेय भी मनमोहन सिंह को जाता है, उनकी आधार योजना की यूएन ने भी तारीफ की थी. यूएन की और से कहा गया था कि आधार स्कीम भारत की बेहतरीन स्कीम है. जैसा कि हम और आप देख ही रहे हैं कि वर्तमान पीएम मोदी की सरकार में आधार संख्या को यूनीक नंबर होने के चलते विभिन्न कामों में अनिवार्य कर दिया गया है. भाईसाब, आपको हैरानी होगी कि मनमोहन सिंह के कार्यकाल में ही राइट टु एजुकेशन यानी शिक्षा का अधिकार अस्तित्व में आया. इसके तहत 6 से 14 साल के बच्चे को शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित किया गया. कहा गया कि इस उम्र के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा दी ही जाएगी.

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भाईसाब, आपको पता होना चाहिए कि विदेश में पीएचडी पूरी करने के बाद उन्हें जब डॉक्टर की उपाधि मिली। इसके बाद मनमोहन सिंह ने पंजाब विश्वविद्यालय और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में अर्थशास्त्र पढ़ाया। छात्र उन्हें शिक्षक के रूप में काफी पसंद करते थे। बता दें कि उन्हें जिनेवा में दक्षिण आयोग में महासचिव के रूप में भी नियुक्त किया गया था। इतना ही नहीं मनमोहन सिंह 1971 में वाणिज्य मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार और 1972 में वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार भी रह चुके हैं। इसके बाद वह योजना आयोग के उपाध्यक्ष, रिजर्व बैंक के गवर्नर, प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष भी रहे।

चलते-चलते भाईसाब, आपको जानकारी दे दें कि मनमोहन सिंह को भारत दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान 1987 में पद्म विभूषण से भी नवाजा जा चुका है। इसी के साथ 1993 में सर्वश्रेष्ठ वित्त मंत्री के लिए यूरो मनी अवॉर्ड मिल चुका है और कैम्ब्रिज और ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटीज सहित कई विश्वविद्यालयों की ओर से मानद उपाधियां प्रदान की गई हैं।

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