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भारतीय जेम्स बॉन्ड ! | Ajit Doval

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अंग्रेजी फिल्मों में जेम्स बॉन्ड का नाम तो आपने जरूर सुना होगा। लेकिन आप क्या जानते हैं भारत के वास्तविक जेम्स बॉन्ड के जीवन के बारे में। जी हां भाईसाब, हम बात कर रहे हैं भारत के तत्कालिन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल की जो एक पूर्व भारतीय खुफिया अधिकारी भी रह चुके हैं।अजित डोवाल 30 मई, 2014 को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में अपना पद ग्रहण कियाऔर उसी साल इराक के तिकरित के एक अस्पताल में फंसी 46 भारतीय नर्सोंको सुरक्षित भारत वापस लेकर आये।इसके इलावा इन्होने कई शीर्ष-गुप्त मिशनों और राष्ट्र की सुरक्षा से संबंधित कई खुफिया अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाया है।
आज के इस लेख में हम जानेंगे वास्तविक जेम्स बांड अजित डोवाल जी के बारे में।

अजीत डोभाल का जन्म 20 जनवरी, 1945 को भारत के उत्तराखंड में पौरी गढ़वाल के गिरी बनेलस्युं गाँव में हुआ था।
इनके पिता मेजर जी एन डोभाल एक भारतीय सेना अधिकारी थे।
इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के लिए राजस्थान के अजमेर में अजमेर मिलिट्री स्कूल में पढ़ाई की। 1967 में, उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से economics में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की।
वर्ष 1972 में अरुणी डोभाल के साथ इनकी शादी हुई और इनके दो बेटे हैं, शौर्य डोभाल और विवेक डोभाल.
उनके पुलिस और इंटेलिजेंस करियर के बारे में बात करें तो पुलिस और ख़ुफ़िया सेवाओं में विभिन्न पदों पर कार्य करते हुए एक चतुर और समर्पित अधिकारी के रूप में ख्याति प्राप्त की।
डोभाल 1968 में केरल कैडर के हिस्से के रूप में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में शामिल हुए। जहाँ वह 1971 का थालास्सेरी दंगा जो की करेला में हुआ था उसको अपनी सूझबूझ से रोकने में सफल हुए। केरल के थालास्सेरी में कुछ समय काम करने के बाद, 1972 में डोभाल केंद्रीय सेवा में भर्तीहुए।उन्होंने 33 वर्षों से अधिक समय तक इंटेलिजेंस ब्यूरो में सेवा की।
यहां उन्होंने खुद को भारत के अब तक के सर्वश्रेष्ठ खुफिया अधिकारियों में से एक साबित किया।
IB जासूस के तौर पर वह सात साल तक पाकिस्तान में रहे। वे1971 से 1999 तक इंडियन एयरलाइंस के विमान अपहरण की सभी 15 घटनाओं या आतंकवाद विरोधी अभियान को अंजाम देने में शामिल रहे।
उन्हें भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति को defensive से defensive offensive में बदलने के साथ-साथ पाकिस्तान के संबंध में double squeeze policy का श्रेय दिया जाता है।
1988 में ऑपरेशन Black Thunder के दौरान उन्होंने स्वर्ण मंदिर में घुसपैठ की. उन्होंने खुद को ISI एजेंट बताया और खालिस्तानी अलगाववादियों की जासूसी की। वह उनके समूह का एक महत्वपूर्ण सदस्य बन गए और जानकारी एकत्र की जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) को स्वर्ण मंदिर को खाली करने में मदद मिली।
डोभाल ने 1986 में मिजोरम समझौते पर हस्ताक्षर करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे पूर्वोत्तर भारत के राज्य मिजोरम में वर्षों से जारी विद्रोह का अंत हुआ।
उन्होंने सिक्किम और भारत के मिलन के लिए खुफिया जानकारी जुटाने में योगदान दिया। वह अपहृत IC-814 के यात्रियों की रिहाई के लिए बातचीत करने के लिए कंधार, अफगानिस्तान भेजे गए समूह के सदस्य थे।
आईबी ऑपरेशन विंग के प्रमुख के रूप में एक दशक तक काम करने के बाद, उन्होंने 2004 से 2005 में अपनी सेवानिवृत्ति तक आईबी के निदेशक के रूप में कार्य किया।
2014 में डोभाल को भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनाया गया।
वहीँ डोभाल को तत्कालीन विदेश सचिव एस. जयशंकर और भारतीय राजदूत के साथ, राजनयिक चैनलों और वार्ता के माध्यम से डोकलाम गतिरोध को समाप्त करने का श्रेय दिया जाता है।
अजीत डोभाल ने 2019 बालाकोट हवाई हमले के बाद पाकिस्तानी सेना द्वारा बंदी बनाए गए भारतीय पायलट अभिनंदन वर्धमान की रिहाई के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से बातचीत की थी।
अक्टूबर 2018 में, उन्हें Strategic Policy Group (SPG) के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था।
बाद में 2019 में, उन्हें 5 साल के लिए NSA के रूप में फिर से नियुक्त किया गया और कैबिनेट मंत्री बनाया गया। वह इस तरह का पद पाने वाले पहले एनएसए हैं।
डोभाल की देखरेख में बातचीत के माध्यम से, म्यांमार के सैन्य बलों ने 15 मई, 2020 को असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में सक्रिय 22 उग्रवादी नेताओं के एक समूह को भारत सरकार को सौंप दिया।
डोभाल ने 15 सितंबर, 2020 को एक Virtual SCO मीटिंग से बाहर आ गए जब पाकिस्तान ने एक fictious map को प्रदर्शित किया जिसमें भारत के कुछ हिस्सों को नहीं दिखाया गया था।
2009 में, डोभाल विवेकानन्द इंटरनेशनल फाउंडेशन (VIF) के संस्थापक निदेशक बने।2009 और 2011 में उन्होंने “विदेश में गुप्त बैंकों और टैक्स हेवन्स में भारतीय काले धन” पर दो रिपोर्टों का सह-लेखन किया।
2012 के दौरान, उन पर आईबी की नजर थी क्योंकि तत्कालीन सत्तारूढ़ कांग्रेस को डोभाल और उनके थिंक टैंक VIF पर संदेह था और उनका मानना था कि वे रामदेव और अन्ना हजारे के नेतृत्व वाले भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के लिए जिम्मेदार थे, जिसने सरकार के प्रति जनता में नाराजगी पैदा की थी।
उनकी सेवाओं के लिए उन्हें कई सम्मानों से सम्मानित किया गया है।
ऑपरेशन ब्लैक थंडर में उनके योगदान के लिए डोभाल को भारत के सर्वोच्च सैन्य पुरस्कारों में से एक कीर्ति चक्र मिला।
2015 में, उन्हें भारत का तीसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान पद्म भूषण मिला।
इसके इलावा डोभाल पुलिस पदक पाने वाले सबसे कम उम्र के पुलिस अधिकारी थे और बाद में उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था।
उनके व्यक्तित्व ने entertainment industry को आकर्षित किया
डोभाल एपिक टीवी कार्यक्रम Adrishya में दिखाई दिए, जिसमें ऑपरेशन ब्लैक थंडर के दौरान खालिस्तानी आतंकवादियों पर उनकी जीत पर प्रकाश डाला गया। वहीँ उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक (2019) में उनका काल्पनिक चरित्र परेश रावल द्वारा चित्रित किया गया था।
राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति जुनून रखने वाले अजीत डोभाल का भारत के शीर्ष सुरक्षा सलाहकार के पद तक पहुंचना उनकी प्रतिभा और अटूट समर्पण का प्रमाण है। जो देश को अधिक सुरक्षित भविष्य की ओर मार्गदर्शन कर रहा है क्योंकि भारत कठिन सुरक्षा चुनौतियों का लगातार सामना कर रहा है और हमारी सिक्योरिटी फोर्सेज और इंटेलिजेंस व्यवस्था हर मंसूबो को उनके अंजाम तक पहुंचा रही हैं।
आशा करते है भाईसाहब से मिली यह जानकारी आपको पसन्द आई होगी ,ऐसे ही उम्दा जानकारियों के लिए हमसे जुड़े रहिये।
धन्यवाद!

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